डॉ. भीमराव अम्बेडकर के शैक्षिक तथा सामाजिक विचारों का अध्ययनरू वैचारिक अधिष्ठान, ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और समकालीन प्रासंगिकता
Authors: नरेशपाल सिंह, नीरज शर्मा
DOI: https://doi.org/10.37082/IJIRMPS.v13.i4.232719
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Country: India
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Abstract: डॉ. भीमराव अम्बेडकर (1891दृ1956) आधुनिक भारत के सर्वाधिक प्रभावशाली विचारकों, विधिवेत्ताओं और समाज-संशोधकों में अग्रणी हैं। उनके विचारों का केंद्र बिंदु बहुस्तरीय वंचना विशेषतः जाति, वर्ग और लिंग के उन्मूलन के लिए शिक्षा, विधि, लोकतंत्र और नैतिक मानवीयता के समन्वित प्रयोग में निहित है। यह शोध-पत्र अम्बेडकर के शैक्षिक तथा सामाजिक विचारों का बहुविमीय अध्ययन प्रस्तुत करता है। पहले खण्ड में उनकी वैचारिक पृष्ठभूमि, शिक्षण-प्रशिक्षण और प्रमुख ग्रंथों का विहंगावलोकन किया गया है। दूसरे खण्ड में शिक्षा-दर्शन जैसे समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक शिक्षा, तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा, स्त्री-शिक्षा, बहुभाषिकता तथा नैतिक-नागरिक शिक्षाकृका विश्लेषण है। तीसरे खण्ड में उनके सामाजिक विचारों जाति-उच्छेदन, समतामूलक लोकतंत्र, संवैधानिकता, श्रम-न्याय, धार्मिक-स्वतंत्रता, स्त्री समानता और मानवाधिकार का विवेचन है। चैथे खण्ड में नीतिगत निहितार्थ, समकालीन शिक्षा-सुधार, आरक्षण की संवैधानिकता, सामाजिक न्याय के उभरते मानदंड, और डिजिटल-युग की असमानताओं से निपटने के उपाय प्रस्तावित हैं। अध्ययन का निष्कर्ष यह रेखांकित करता है कि अम्बेडकर की दृष्टि केवल पीड़ित-बहुजन के उद्धार तक सीमित नहीं, बल्कि समूचे समाज के नैतिक लोकतंत्रीकरण की परियोजना है जहाँ शिक्षा ज्ञान के साथ-साथ गरिमा, बंधुता और न्याय का क्रियाशील माध्यम बनती है।
Keywords: डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, शिक्षा-दर्शन, जाति-उच्छेदन, संवैधानिकता, सामाजिक न्याय, आरक्षण, स्त्री-स्वाधिकार, श्रम-न्याय, मानवाधिकार, नैतिक लोकतंत्र।
Paper Id: 232719
Published On: 2025-07-23
Published In: Volume 13, Issue 4, July-August 2025
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