International Journal of Innovative Research in Engineering & Multidisciplinary Physical Sciences
E-ISSN: 2349-7300Impact Factor - 9.907

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हिंदी भाषा: संभावनाएं और चुनौतियाँ

Authors: Vandana Sharma

DOI: https://doi.org/10.37082/IJIRMPS.v14.i5.233215

Short DOI: https://doi.org/hcjfxt

Country: India

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Abstract: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हिंदी भाषा का मेल डिजिटल क्रांति की एक नई शुरुआत है, जो हिंदी को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने के साथ-साथ कुछ तकनीकी व भाषाई बाधाओं का भी सामना कर रहा है। संभावनाएं (Possibilities)शिक्षा और ई-गवर्नेंस: BHASHINI जैसे राष्ट्रीय मंचों और AI चैटबॉट्स के जरिए ग्रामीण व वंचित वर्गों के लिए शिक्षा और सरकारी योजनाओं तक हिंदी में पहुंच आसान हो रही है। अनुवाद और वैश्विक पहुंच: ऑटोमेटेड ट्रांसलेशन सिस्टम और जनरेटिव AI के आने से हिंदी साहित्य, तकनीकी सामग्री और अकादमिक डेटा का अन्य भाषाओं में अनुवाद सरल हो गया है। प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और भाषाई अभिलेखन में AI हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को सहेजने में मदद कर रहा है।
चुनौतियाँ (Challenges)
सांस्कृतिक प्रज्ञा (Cultural Intelligence) का अभाव: AI मुहावरों, कहावतों, व्यंग्य और स्थानीय संवेदनाओं के शाब्दिक अनुवाद से आगे बढ़कर उनके वास्तविक भाव को समझने में अक्सर असफल रहता है।
जटिल व्याकरण और डेटा की कमी: देवनागरी लिपि और उसकी मात्राओं की जटिलता के कारण कंप्यूटर प्रोसेसिंग धीमी और महंगी होती है। साथ ही, उच्च गुणवत्ता वाले डिजिटल हिंदी डेटा का अभी भी अभाव है।
पश्चिमी मॉडलों का प्रभुत्व: अधिकांश बड़े लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) पश्चिमी मानकों और अंग्रेजी भाषा पर आधारित हैं, जो भारतीय भाषाओं की विविधता के साथ पूरा न्याय नहीं कर पाते।

Keywords:


Paper Id: 233215

Published On: 2026-09-13

Published In: Volume 14, Issue 5, September-October 2026

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